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Sunday lunch is always pretty social.
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भारत और पाकिस्तान का व्यापार समस्याओं और फायदे से जूझ रहा है। दोनों तरफ के लोगों को एक दूसरे के देशों में व्यापार करने से रोका जा रहा है। आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार और निवेश फिर से होने की उम्मीद लगाई जा रही है। पाकिस्तान के लोग भारत से खरीदारी करना पसंद करते है और भारत के लोगों को जब भी मौका मिलता है वो भी समान खरीदने से पीछे नहीं हटते, खासकर कपड़े खरीदने के मामले में, ऐसे में भारत पाकिस्तान के व्यापार संबंध साफ्टा समझौता व्यापार नीतियों को आगे बढ़ाने में एक रास्ता हो सकता है।
समाज में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका ने राष्ट्रों की स्थिरता, प्रगति और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित किया है| भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महिलाओं की अहम भूमिका रहीं है| यह अनुमान है की महिलाएं कुल सकल घरेलु उत्पाद में लगभग 17-18 प्रतिशत का योगदान करती है| इस साल के केन्द्रीय बजट में वित्त मंत्री ने कहा की बजट को मुख्य रूप से दो मुख्य क्षेत्रों को लाभान्वित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो महिला छात्र और किसान हैं|
कर्तव्य से तात्पर्य “चाहिए से” है शिशुओं मे शुरुवाती नैतिक मूल्यों को आज्ञा का पालन कराने के लिए परिवार इन मूल्यों को सीखाते है जैसे माता पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए, अपने से बड़ों का हमेशा आदर व सत्कार करना चाहिए इत्यादि। इसी संदर्भ में संविधान निर्माताओं ने नागरिकों के लोकतान्त्रिक दायित्वों के अनुपालन करने के लिए इन मौलिक कर्तव्यों को उल्लेखित किया गया जैसे संविधान का पालन करे उसके आदर्शों, संस्था, राष्ट्रद्वज और राष्ट्रगान का पालन करे। भारत की प्रभुता, एकता, व अखंडता की रक्षा करे एवं उसे अक्षुण रखे।
बजट देश की आय और व्यय का विवरण तो देता ही है साथ ही यह भी बताता है कि हमारी अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति है। बजट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कितनी गति से चल रही है। आम लोगों के सपनों में कितनी गति देगा बजट और साथ ही विकास के इंजन की रफ्तार क्या होगी। 1948 में सकल घरेलू बचत 9.5 फ़ीसदी (जीडीपी का) था जो आज 2022 में 31.4 फ़ीसदी (जीडीपी का) हो गया है। बचत में वृद्धि से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और बैंक के पास भी नगदी रहेगी। इसी प्रकार वित्त वर्ष 2021-2022 में कर संग्रह 7.1 फ़ीसदी (जीडीपी का) जा पहुंचा। जिससे राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और सरकार हाथ खोलकर खर्च करेगी।
फिल्म लगान की पृष्ठभूमि 1893 के आसपास के उस सामाजिक संरचना को बताती है जहाँ सामाजिक व्यवस्था व्यक्ति पर न हो कर समाज के विभिन्न अंगों पर आश्रित होती थी। करीब 3 घंटे की इस फिल्म में समाज के सभी ताने-बाने को इसमे बताने की कोशिश की गई है। मुझे गाँव के समाज को, उसकी संरचना को समझने में हमेशा से दिलचस्पी रही है, क्योंकि मेरा पालन पोषण गाँव में ही हुआ है। इसी दिलचस्पी को विस्तृत पात्रों द्वारा आशुतोष ग्वालरिकर नें बहुत ही बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित किया है।
दिन 21 सितंबर 2019, स्थान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, वक्तव्य दे रहे थे संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटेनियो गुटेरस। अपने संबोधन में एंटेनियो कहते हैं कि भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दुनिया को भारत के कदम से सीखने की ज़रूरत हैं। भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा निवेश किया है जो प्रसंशनीय है। दरअसल एंटेनियो भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र को उपहार में दिए गए गांधी सोलर पार्क का उद्घाटन कर रहे थें। इस पार्क के कारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अब पूरी तरह हरित ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है।आज भारत दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र के रूप में अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। देश के आजादी के 75 साल पूरे हो चुके हैं। इस उत्सव का जश्न देश का प्रत्येक नागरिक अपने अपने तरीके से मना रहा है। हर व्यक्ति हर तरह का प्रण ले रहा है। इसी कड़ी का एक प्रण है आजादी का अमृत महोत्सव हरित और स्वच्छ ऊर्जा के संकल्प के साथ। क्यों जरुरी है हरित और स्वच्छ ऊर्जा?पृथ्वी पर वर्तमान समय में उपलब्ध ऊर्जा के अनवीकरणीय भंडार एक सीमित मात्रा में उपलब्ध है। इन्हें खत्म होने के बाद दोबारा बनने में हजारों साल लगते हैं। इसके साथ साथ इसके इस्तेमाल करने से अत्यधिक वायु प्रदूषण होता है जिसके कारण ग्रीन हाउस गैस, कार्बन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन से लगातार पहाड़ों के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। जिसके कारण लगातार समुद्रों का जलस्तर बढ़ रहा है।हरित ऊर्जा की कितनी जरूरत?किसी भी संप्रभु राष्ट्र के विकास के लिए उर्जा सबसे बड़ी जरूरत है। पूरे देश के विकास की नींव उर्जा पर निर्भर है। ऊर्जा लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने के साथ साथ लोगों के आजीविका में भी मदद करती है। भारत वर्तमान में अपने ऊर्जा जरूरत का लगभग 36 फीसदी हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से पूरा कर रहा है। वर्तमान समय में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा शक्ति की कुल क्षमता 136 मेगावाट है जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 450 मेगावाट किए जाने का प्रस्ताव है। भारत में मौजूद प्राकृतिक संसाधन की अगर बात करे तो भारत के पास दुनिया के कुल प्राकृतिक गैस भंडार का कुल 0.6 फीसदी और 0.3 फीसदी तेल भंडार उपलब्ध है। इसके साथ साथ भारत अपने ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए कोयले पर निर्भर है। ऊर्जा के ये सभी श्रोत एक तो काफी खर्चीले है उसके साथ साथ इससे काफी प्रदूषण भी फैलता है। आज भारत पूरी दुनिया का तीसरा सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन वाला देश है। इन तमाम कारणों से देश में हरित और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत महसूस की जा रही है।क्या हरित ऊर्जा ही है एकमात्र विकल्प?ग्रीन हाउस गैस और वायु मंडल में कार्बन की बढ़ती मात्रा से आज पूरा विश्व चिंतित है। इसके कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ साथ वायुमंडल के गर्म होने से उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिससे कारण कई द्वीपीय देश तथा तटीय इलाकों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इन तमाम कारणों के लिए एक तरह से ऊर्जा के पारंपरिक श्रोत कसूरवार है। इन आपदाओं से बचने के लिए भारत ही नहीं पूरे विश्व को हरित ऊर्जा अपनाने तथा उसे बढ़ावा देने की आवश्यकता हैं। हालांकि काफी पहले से हमारे देश में इसपर पूरे जोड़ शोर से काम हो रहा है। हरित ऊर्जा और देश का भविष्यभारत ही नहीं पूरी दुनिया हरित ऊर्जा को भविष्य के ऊर्जा विकल्प के रूप में देख रही है। ऊर्जा के पारंपरिक श्रोत को दरकिनार कर भारत समेत दुनिया के कई देश अब हरित ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। भारत ने खुद पहल करते हुए अंतराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नींव रखी। आज इस गठबंधन को पूरी दुनिया के 120 से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त हैं। इस संगठन का उद्देश कर्क और मकर रेखा के बीच बसे उन देशों को एक मंच पर लाना हैं जहां धूप की बहुलता है। इस प्रयास को पूरी दुनिया सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देख रही है। इसके साथ साथ भारत ने हाइड्रोजन ऊर्जा पर भी काफी निवेश करना शुरू किया है। पिछले वर्ष ही केंद्र सरकार ने अपने बजट में एक राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की थी, जो हाइड्रोजन को एक वैकल्पिक ईंधन श्रोत के रूप में उपयोग करने का रोडमैप तैयार करेगा। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत हाइड्रोजन का प्रयोग ऊर्जा के पारंपरिक श्रोत के बदले किया जाएगा जिसके कारण भारत कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को पूरा कर सकता है। इसके साथ साथ यह भारत के ऊर्जा जरूरत को पूरा करने हेतु आयात जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भार को भी कम करेगा। हमारे देश के कई शोध संस्थान भी लगातार ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोत की खोज में लगे हैं। हरित ऊर्जा के प्रति सरकार का रुख बीते कई वर्षों ने भारत सरकार ने हरित ऊर्जा उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया है। भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादन करने वाला देश है। वर्ष 2014 में देश में सौर ऊर्जा से 2.63 गीगावट यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा था जो 2021 में बढ़कर 42.33 गिगावाट हो गया। सौर ऊर्जा के सयंत्रो के निर्माण, उसके रखरखाव तथा उसके उत्पादन आधारित प्रोत्साहन हेतु भारत सरकार ने बजट 2022-23 में 1950 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। इसके साथ साथ जीवाश्म गैस संबंधित ऊर्जा के लिए भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। केंद्र सरकार ने गैसीय ऊर्जा को वर्तमान में 6 प्रतिशत से बढ़ाकर साल 2030 तक 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष रखा है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाकर इस्तेमाल करने की इजाजत पहले ही दी जा चुकी है इसके साथ साथ साल 2030 तक डीजल में 5 प्रतिशत तक बायो डीजल मिलाकर उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में नई दिल्ली नगर निगम ने 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग करने वाला नगर निगम बनने की बात कही। एनएमडीसी 2025 तक अपने इसे पूरा करने का लक्ष रखा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने राज्य का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारी सरकार राज्य की ऊर्जा जरूरत को शत प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से पूरा करने हेतु प्रयासरत है। ग्लासगो में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंचामृत की बात कहीं जिसमें दो प्रमुख अमृत तत्व भारत को अपनी अक्षय ऊर्जा को 50 गीगावाट तक बढ़ाने और 2030 तक अपने जरूरत का 50 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से पूरा करने हेतु प्रतिबद्ध है। इन तमाम प्रयासों की वजह से भारत भविष्य के अक्षय ऊर्जा महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है।
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को लाने का प्राथमिक उद्देश्य आर्थिक विकास को आगे बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करना, ऊर्जा तक पहुंच में सुधार करना और जलवायु परिवर्तन को कम करना है। टिकाऊ ऊर्जा के उपयोग और नागरिकों के लिए सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करके सतत विकास संभव है। मजबूत सरकारी समर्थन और तेजी से अनुकूल आर्थिक स्थिति ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक अक्षय ऊर्जा बाजारों में शीर्ष नेताओं में से एक बना दिया है। सरकार ने देश में अक्षय ऊर्जा बाजार में तेजी से वृद्धि करने के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतियां, कार्यक्रम और उदार वातावरण तैयार किया है। यह अनुमान है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में घरेलू रोजगार सृजित कर सकता है। इस पत्र का उद्देश्य भारत में अक्षय ऊर्जा के विकास के कारण महत्वपूर्ण उपलब्धियों, संभावनाओं, अनुमानों, बिजली उत्पादन के साथ-साथ चुनौतियों और निवेश और रोजगार के अवसरों को प्रस्तुत करना है। इस समीक्षा में, हमने अक्षय क्षेत्र के सामने आने वाली विभिन्न बाधाओं की पहचान की है। समीक्षा परिणामों के आधार पर सिफारिशें नीति निर्माताओं, स्कीम डेवलपर्स, निवेशकों, उद्योगों, संबद्ध हितधारकों और विभागों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करेंगी।
इंसान चौथी औद्योगिक क्रांति के दरवाजे पर खड़ा है। इस दरवाजे के बाहर कदम रखते ही इंसान के जीवन जीने का तरीका बदल जाएगा। इस नयी दुनिया में जाने के लिए बहुत सी नयी-नयी तकनीकी और प्रोद्योगिकियों को विकसित किया जा रहा है, ये आधुनिक औजार मानव के जटिल कार्यों को करने जैसे कि सीढ़ियाँ चढ़ना, कार चलाने जैसे कार्यों को करने में सक्षम होगा।
वित्त वर्ष 2022-2023 के बजट से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में विकास को चमत्कार के रूप में होते देख सकेंगे। आर्थिक सर्वेक्षण मे जीडीपी की वृद्धि दर को 9.2 प्रतिशत रखने का अनुमान है बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा की उनकी सरकार विकास और गरीबी की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।
कोविड-19 द्वारा उत्पन्न वैश्विक स्वास्थ्य संकट ने एक विशाल मानवीय मृत्यू दर के अलावा विश्व अर्थव्यवस्था को पिछले सदी से भी अधिक बार आघात पहुचाया है। महामारी और सम्बद्ध लॉकडाउन उपायों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को बंद कर दिया था जिससे पिछले साल मंदी आई थी विश्व बैंक के अनुसार विश्व अर्थव्ययवस्था 2021 में 5.5 प्रतिशत और आईएमएफ़ के अनुसार 5.9 प्रतिशत की गिरावट रही थी। दुनिया के सामने खड़ा संकट कई मायनों में अनूठा है।
स्वच्छता हमारे जीवन में बुनियादी आवश्यकता की तरह है जैसे हमें रोटी कपड़ा और मकान की जरूरत है वैसे ही स्वच्छता भी इन्ही बुनियादी आवश्यकता के रूप में होनी चाहिए। स्वच्छता हमारी प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए। हमे स्वच्छता और सफाई की अहमियत का पता होना चाहिए हमे अपने देश समाज और लोगों से गंदगी को हटाना चाहिए तभी हम एक अच्छे और बेहतर स्वास्थ्य की भी परिकल्पना कर सकेंगे, तभी हम सतत विकास की अवधारणा वाले सभी 16 लक्ष्यों के प्रति भी आगे बढ़ सकेंगे।
एक तरफ जहां ओमिक्रोन के बढ़ रहे मामले से देश में तीसरी लहर की आशंका दिख रही है वहीं दूसरी तरफ बड़े बड़े दिग्गज नेता शहर शहर रैलियाँ कर रहे है। कहीं पी.एम. मोदी की रैली तो कहीं सी.एम. योगी की विशल रैली कहीं अखिलेश यादव की विशाल संकल्प यात्रा हो रही है तो कहीं प्रियंका गांधी की प्रतिज्ञा रैली। दूसरी तरफ स्कूलों कालेजों और बड़े बड़े शैकक्षिक संस्थानों को खुलने से पहले ही बंद करवा दिया गया है। सवाल यहाँ ये है कि स्कूल कालेजों को बंद करवा कर, बिना मास्क और कोविड प्रोटोकॉल को तोड़कर क्या हम ओमीक्रॉन से लड़ सकते है...तो जवाब है नहीं। दूसरी लहर से पहले भी ऐसी यात्राए और जनसभाए हो रही थी। वो दृश्य आज भी हमे विचलित करते है जब अस्पतालों में लोग आक्सिजन गैस को लेकर परेशान थे और भयभीत भी। यूरोप के देशों में ओमीक्रॉन के लगातार बढ़ते मामले से यह खतरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।
भारत के नौकरशाही(ब्यूरोक्रेसी) और राजनीतिक सोच में अब एक बदलाव नजर आता है कि भारत अब पहले की तरह गरीब देश नही रहा भारत अब काफी विकास कर चुका है और उस पथ पर भी अग्रसर है, चाहे वह प्याज की दिक्कत हो, गेहूं की दिक्कत हो या फिर लड़ाकू विमानों की दिक्कत हो भारत इन दिक्कतों से लड़ सकता हैं। लेकिन सचाई यह भी है की भारत में गरीबी ज्यादा है, कुपोषण की समस्या ज्यादा है।संसाधनों(अवसर) की समस्या ज्यादा है, बहुत से छात्र या छात्राएं अपना दाखिला ले तो लेते है लेकिन स्कूल जाना छोड़ देते है। बहुत से ऐसे विद्यार्थी है जो स्नातक के बावजूद भी बेरोजगार है, ऐसे भी है जिन्होंने व्यवसायिक प्रशिक्षण लिया है फिर भी बेरोजगार है। यह बात भी सच है की अभी जननाकीय लाभांश भारत के पक्ष में है और व्यवहार रूप से भारत अभी युवा देश भी है। अगर हमने सही समय पर इसका लाभ नहीं उठाया तो आगे चलकर यही हानिकारक भी हो सकता है।
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